साधना के छः विघ्न

  1. निद्रा,
  2. तंद्रा,
  3. आलस्य,
  4. मनोराज,
  5. लय और
  6. रसास्वाद

ये छ: साधना के बड़े विध्न हैं । अगर ये विध्न न आयें तो हर मनुष्य भगवान के दर्शन कर ले ।

“जब हम माला लेकर जप करने बैठते हैं, तब मन कहीं से कहीं भागता है । फिर ‘मन नहीं लग रहा…’ ऐसा कहकर माला रख देते हैं ।

 घर में भजन करने बैठते हैं तो मंदिर याद आता है और मंदिर में जाते हैं तो घर याद आता है । काम करते हैं तो माला याद आती है और माला करने बैठते हैं तब कोई न कोई काम याद आता है |” ऐसा क्यों होता है? यह एक व्यक्ति का नहीं, सबका प्रश्न है और यही मनोराज है ।

कभी-कभी प्रकृति में मन का लय हो जाता है । आत्मा के दर्शन नहीं होते किंतु मन का लय हो जाता है और लगता है कि ध्यान किया ।ध्यान में से उठते है तो जम्हाई आने लगती है । यह ध्यान नहीं, लय हुआ ।वास्तविक ध्यान में से उठते हैं तो ताजगी, प्रसन्नता और दिव्य विचार आते हैं किंतु लय में ऐसा नहीं होता ।

कभी-कभी साधक को रसास्वाद परेशान करता है । साधना करते-करते थोड़ा बहुत आनंद आने लगता है तो मन उसी आनंद का आस्वाद लेने लग जाता है और अपना मुख्य लक्ष्य भूल जाता है ।

कभी साधना करने बैठते हैं तो नींद आने लगती है और जब सोने की कोशिश करते है तो नींद नहीं आती । यह भी साधना का एक विघ्न है ।

WITH ENGLISH SUBTITLES

निद्रा का व्‍यवधान क्‍यों होता है कि शरीर में थकान होती है तो निद्रा का व्‍यवधान होता है अथवा तो भीतर का रस नहीं मिलता है तो व्‍यवधान होता है । …… तो इसमें निद्रा ठीक ले लो, नहीं तो थोड़ी निद्रा आती है तो डरो मत… निद्रा के बाद फिर शांत हो जाओ । व्‍यवधान नहीं है निद्रा भी….. चिंतन करते करते थोड़ा निद्रा में चले गये, थक मिटे तो फिर चिंतन में चले आओ । इतना परिश्रम नहीं करो कि साधन में बैठे कि निद्रा आ जाये और इतना जागो मत कि निद्रा की कमी रहे और इतनी निद्रा कम मत करो, इतनी निद्रा ज्‍यादा मत करो कि भगवान में शांत होने का समय न मिले । ठीक से नींद करो और ठीक से ध्‍यान-भजन का समय निकालो । रूचि भगवान में होगी, प्रीति तो निद्रा नहीं आयेगी । थकान होगी तो भी निद्रा आयेगी । थकान भी न हो, और थकान है निद्रा आती है तो अच्‍छा ही है… स्‍वास्‍थ्‍य के लिये ठीक ही है ।

तंद्रा भी एक विघ्न है । नींद तो नहीं आती किंतु नींद जैसा लगता है । यह सूक्ष्म निद्रा अर्थात तंद्रा है ।

साधना करने में आलस्य आता है । “अभी नहीं, बाद में करेंगे…” ऐसा सोचते हैं तो यह भी एक विघ्न है ।

इन विघ्नों को जीतने के उपाय भी हैं ।

मनोराज एवं लय को जीतना हो तो दीर्घ स्वर से ॐ का जप करना चाहिए ।

स्थूल निद्रा को जीतने के लिए अल्पाहार और आसन करने चाहिए । सूक्ष्म निद्रा यानी तंद्रा को जीतने के लिए प्राणायाम करने चाहिए ।

आलस्य को जीतना हो तो निष्काम कर्म करने चाहिए । सेवा से आलस्य दूर होगा एवं धीरे-धीरे साधना में भी मन लगने लगेगा ।

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About Awakening of Sanatan Dharma

The site is dedicated to Sant Shree Asaram Bapuji , greatest saint of INDIA at present times ..... GET READY to know the TRUTH of FAKE CHARGES against HIM ....

Posted on June 13, 2014, in Books, Books, Prayer, Sadhna, Sat-sahitya, Satsang, Video and tagged , , . Bookmark the permalink. Leave a comment.

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