Author Archives: ashramsewa

मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम !

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रामावतार को लाखों वर्ष हो गये लेकिन श्रीरामजी अभी भी जनमानस के हृदय-पटल से विलुप्त नहीं हुए। क्यों? क्योंकि श्रीरामजी का आदर्श जीवन, उनका आदर्श चरित्र हर मनुष्य के लिए अनुकरणीय है।

एक आदर्श पुत्र, आदर्श भाई, आदर्श पति, आदर्श पिता, आदर्श शिष्य, आदर्श योद्धा और आदर्श राजा के रूप में यदि किसीका नाम लेना हो तो भगवान श्रीरामजी का ही नाम सबकी जुबान पर आता है। इसीलिए राम-राज्य की महिमा आज लाखों-लाखों वर्षों के बाद भी गायी जाती है।

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भगवान श्रीरामजी के सद्गुण ऐसे तो विलक्षण थे कि पृथ्वी के प्रत्येक धर्म, सम्प्रदाय और जाति के लोग उन सद्गुणों को अपनाकर लाभान्वित हो सकते हैं।

श्रीरामजी सारगर्भित बोलते थे। उनसे कोई मिलने आता तो वे यह नहीं सोचते थे कि पहले वह बात शुरू करे या मुझे प्रणाम करे। सामनेवाले को संकोच न हो इसलिए श्रीरामजी अपनी तरफ से ही बात शुरू कर देते थे।

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श्रीरामजी दूसरों की बात बड़े ध्यान व आदर से सुनते थे। बोलनेवाला जब तक अपने और औरों के अहित की बात नहीं कहता, तब तक वे उसकी बात सुन लेते थे। जब वह किसीकी निंदा आदि की बात करता तब देखते कि इससे इसका अहित होगा या इसके चित्त का क्षोभ बढ़ जायेगा या किसी दूसरे की हानि होगी, तब वे सामनेवाले की बातों को सुनते-सुनते इस ढंग से बात मोड़ देते कि बोलनेवाले का अपमान नहीं होता था।

युद्ध के मैदान में श्रीरामजी एक बाण से रावण के रथ को जला देते, दूसरा बाण मारकर उसके हथियार उड़ा देते फिर भी उनका चित्त शांत और सम रहता था। वे रावण से कहते : ‘लंकेश! जाओ, कल फिर तैयार होकर आना।’

ऐसा करते-करते काफी समय बीत गया तो देवताओं को चिंता हुई कि रामजी को क्रोध नहीं आता है, वे तो समता-साम्राज्य में स्थिर हैं, फिर रावण का नाश कैसे होगा? लक्ष्मणजी, हनुमानजी आदि को भी चिंता हुई, तब दोनों ने मिलकर प्रार्थना की : ‘प्रभु! थोड़े कोपायमान होइये।’

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तब श्रीरामजी ने क्रोध का आवाहन किया : क्रोधं आवाहयामि। ‘क्रोध! अब आ जा।’

श्रीरामजी क्रोध का उपयोग तो करते थे किंतु क्रोध के हाथों में नहीं आते थे। हम लोगों को क्रोध आता है तो क्रोधी हो जाते हैं, लोभ आता है तो लोभी हो जाते हैं, मोह आता है तो मोही हो जाते हैं, शोक आता है तो शोकातुर हो जाते हैं लेकिन श्रीरामजी को जिस समय जिस साधन की आवश्यकता होती थी, वे उसका उपयोग कर लेते थे।

श्रीरामजी का अपने मन पर बड़ा विलक्षण नियंत्रण था। सामनेवाला व्यक्ति अपने ढंग से सोचता है, अपने ढंग से जीता है, अतः वह आपके साथ अनुचित व्यवहार कर सकता है परंतु उसके ऐसे व्यवहार से अशांत होना-न होना आपके हाथ की बात है। यह जरूरी नहीं है कि सब लोग आपके मन के अनुरूप ही जियें।

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श्रीरामजी अर्थव्यवस्था में भी निपुण थे। ‘शुक्रनीति’ और ‘मनुस्मृति’ में भी आया है कि जो धर्म, संग्रह, परिजन और अपने लिए – इन चार भागों में अर्थ की ठीक से व्यवस्था करता है वह आदमी इस लोक और परलोक में सुख-आराम पाता है। कई लोग लोभ-लालच में इतना अर्थसंग्रह कर लेते हैं कि वही अर्थ उनके लिए अनर्थ का कारण हो जाता है और कई लोग इतने खर्चीले हो जाते हैं कि कमाया हुआ सब धन उड़ा देते हैं, फिर कंगालियत में जीते हैं। श्रीरामजी धन के उपार्जन में भी कुशल थे और उपयोग में भी। जैसे मधुमक्खी पुष्पों को हानि पहुँचाये बिना उनसे परागकण ले लेती है, ऐसे ही श्रीरामजी प्रजा से ऐसे ढंग से कर (टैक्स) लेते कि प्रजा पर बोझ नहीं पड़ता था। वे प्रजा के हित का चिंतन तथा उसके भविष्य का सोच-विचार करके ही कर लेते थे।

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प्रजा के संतोष तथा विश्वास-सम्पादन के लिए श्रीरामजी राज्यसुख, गृहस्थसुख और राज्यवैभव का त्याग करने में भी संकोच नहीं करते थे। इसीलिए श्रीरामजी का राज्य आदर्श राज्य माना जाता है।

 

 

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गरीबों के लिए पूज्य बापूजी की सहानुभूति !

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 मुझे साम्राज्य की लालसा नहीं, मैं स्वर्ग भी नहीं चाहता ! मेरे जीवन की बस एक ही आकांक्षा है कि इस संसार के दुखी मनुष्यों के कष्टों का नाश कर दूँ !  संत आशाराम बापू का जीवन असहाय और दुखी लोगों की सेवा का एक जीता-जागता उदाहरण है ! जहाँ कहीं गरीबी और अभाव है, जहाँ कहीं रोग और शोक है, जहाँ कहीं अज्ञान और अशिक्षा है, बापू का ह्रदय वहीँ उमड़ पड़ता है !

 

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अपने घर में तो दिया जलाओ, पर किसी गरीब के घर का दिया बुझा हो तो उसके यहाँ भी दिया जला आओ ! गरीब और अमीर के बीच इतना बड़ा फासला, इतना भेद-भाव ! उन गरीबों का ख्याल करोगे तो परमात्मा आप पर ज़रूर राजी होगा ! आप स्वयं तो नए कपडे पहनो, मन नहीं है, पर किसी गरीब को एक कपडा दे आओगे तो ईश्वर तुम पर प्रसन्न हुए बिना रहेगा नहीं !

 

 

आसुमल से हो गए साईं आशाराम !!

पूज्य दादागुरु लीलाशाह बापू की करुणा कृपा से हमारे गुरुदेव आसुमल से आशाराम हुए और आज उनके ही आशीर्वाद से हजारों नहीं वरन लाखों – लाखों और करोड़ों – करोड़ों साधक भाई-बहन लाभान्वित हो रहे हैं और उन्नति के मार्ग पर अग्रसर हो रहे हैं !

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पांच वर्ष के तांशु का कमाल ! गुरुभक्ति ने किया अद्भुत व अलौकिक चमत्कार !

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दिल्ली के एक घर में सभी छोटे छोटे बच्चे आपस में खेल रहे थे और घर के बड़े बाहर गए हुए थे ! तभी अचानक घर  बीटा खेलने की चाह में छत से नीचे गिर गया ! ये देख सभी घबरा गए और तभी उसके चचेरे भाई तांशु ने जिसकी उम्र मात्र पांच वर्ष की ही थी एवं पूज्य बापूजी से दीक्षित था, उसने बाकि बच्चों की सहायता से उस बेहोश बच्चे को कार में रखा और गुरुदेव का ध्यान करते हुए गाडी में बैठ गया ! जिसने कभी गाडी का हैंडल तक नहीं पकड़ा था, उसको आज अचानक प्रेरणा हुई, कि गुरुदेव उसके  साथ हैं और वो निश्चिंत और निडर होकर गाडी चलाये ! उसने गाडी स्टार्ट की और घर से ग्यारह किलोमीटर दूर हॉस्पिटल में ले जाकर भर्ती करवा दिया और अंततः उस बच्चे की जान बचायी जा सकी ! 

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इस अद्भुत वाकये का प्रसारण सभी न्यूज़ चैनल्स पर किया गया एवं अखबारों में भी प्रकाशित हुआ !
यूँ तो पांच साल का बच्चा कार चलाये तो ये कानूनी अपराध की श्रेणी में आता है, परन्तु तांशु ने तो गुरुदेव की प्रेरणा से कार चलायी थी और किसी की जान बचायी थी, इस कारण से उसे राष्ट्रपति की तरफ से पुरस्कृत भी किया गया था ! इसके अलावा बहुत से बड़े एवं उच्च पदों पर आसीन सज्जनो द्वारा भी पुरस्कृत हुआ तांशु !
पर वो हर बार यही कहता रहा और आज भी तांशु के मुख से यही शब्द निकलते हैं कि ” मैंने कुछ नहीं किया, मैं तो बस कार में जाकर बैठ गया था, और जब बापूजी की शक्ति मेरे साथ थी तो सब अपने आप हो रहा था, मुझे तो बस ऐसा लग रहा था कि गुरुदेव मुझे अपनी गोद में बैठाये हैं और स्वयं कार चला रहे हैं !”
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धन्य हैं ऐसे गुरुदेव और उनके ऐसे शिष्य जो हर कदम पर गुरुदेव की करुणा – कृपा को अनुभव करते हैं ! और ऐसे गुरुदेव को पाकर हम साधकों का जीवन भी धन्य है कि वो कभी किसी भी पथ या मार्ग में हमें अकेला नहीं छोड़ते !
 
[youtube https://www.youtube.com/watch?v=ZmFa-guDLm0&feature=youtu.be]

शहद सेवन से फायदे ही फायदे

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शहद खाने में जितना मीठा होता है, उससे कहीं ज्यादा ये हमारी सेहत के लिए फायदेमंद होता है ! इसमें पाए जाने वाले विटामिन ए, बी और सी हमें सेहतमंद रखने में कारगर साबित होतेहैं !

आज हम आपको शहद खाने के क्या-क्या फायदे होते हैं, उसके बारे में बताने जा रहे हैं !

शहद का प्रयोग जहां आंखों की रोशनी बढ़ाने तथा कफ एवं अस्थमा और उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने में कारगर सिद्ध हुआ है, वहीं रक्त शुद्धि तथा दिल को मजबूत करने में भी सहायक है ! सर्दियों में कफ और गला खराब होने की समस्याओं से निपटने में शहद बहुत मददगार है। खासतौर पर बच्चों के लिए ठंड में शहद का सेवन उन्हें पूरे मौसम में कफ और गले की समस्याओं से बचाकर रखता है।इसके सेवन से नींद भी अच्छी आती है।

1) छोटे बच्चों को दूध पिलाने से पहले शहद चटा दें। फिर दूध पिलाएं ये रोग निरोधक क्षमता बढ़ाता है।

2) बेसन, मलाई में शहद मिलाकर त्वचा पर लगाएं। थोड़ी देर बाद धो लें, चेहरा चमक उठेगा ।

3) प्रतिदिन 25 ग्राम शहद दूध के साथ जरूर लें । इससे शरीर को ताकत मिलती है।

4) त्वचा सम्बन्धी रोग हो या कहीं जल-कट गया हो तो शहद लगाएं। जादू सा असर दिखाई देगा।

5) रात को सोने से पहले दूध के साथ शहद लेने पर बहुत अच्छी नींद आती है।

6) दूध में शक्कर की जगह शहद लेने से गैस नहीं बनती और पेट के कीड़े भी निकल जाते हैं।

7) सूखी खाँसी में शहद व नींबू का रस समान मात्रा में सेवन करने पर लाभ होता है।

8) अदरक का रस और शहद समान मात्रा में लेकर चाटने से श्वास कष्ट दूर होता है और हिचकियाँ बंद हो जाती हैं।

ॐ नमः शिवाय

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शांतात्मा को दुख कहाँ – पूज्य संत श्री आशारामजी बापू

Amrit Bindu -- Aakhir Kya Kaam Aayega

मनुष्य का अपना क्या है ?

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भूलो तुम सभी को मगर, माँ – बाप को भूलना नहीं !

14th FEBRUARY

LOVE DIVINE DAY

भूलो तुम सभी को मगर, माँ – बाप को भूलना नहीं !! | मातृ-पितृ पूजन

[audio http://audio.chirbit.com/jaiboss_1391675014.mp3]

जिन मात-पिता ने अपने जीवन की हर सुबह की शुरुआत तुम्हारे हँसते – खिलखिलाते हुए चेहरे को देखकर की, अपने दिन तुम्हें खुश रखने में और अपनी रातें तुम्हारे सुनहरे भविष्य को संजोने में गुज़ार दीं, उन माँ – बाप की सेवा करने का जब अवसर आ रहा है तो क्यों अपने फ़र्ज़ और अपने कर्त्तव्य से विमुख होना ?
आओ आज हम सभी मिलकर उन मात-पिता के चरणों में वंदन कर उनके चेहरे पर ख़ुशी के आंसू छलका जाएं, उनके चेहरों पर मुस्कान ले आयें और उन्हें हर दुःख की छाव से बचाएँ !

जिन्होंने ताउम्र हमारी देखभाल की, आज उनकी सेवा करके अपनी कृतज्ञता व्यक्त करने का सुअवसर आया है ! हमारे प्रेम के सच्चे अधिकारी हमारे माता-पिता हैं, हमारा परिवार है, उन्हीं की छत्र-छाया में हम आज इतने बड़े, संस्कारी और लायक बने हैं ! तो ये प्रेम दिवस हम उन्हीं के साथ मनाएं जिनके उम्र भर के साथ की कल्पना तो भगवन श्री कृष्ण भी करते हैं ! आओ आज हम सभी इस सुअवसर का लाभ उठाएं और अपने मात- पिता की आँखों के तारे बन जाएं !

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