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परमात्मा का पूरा पता ! तात्विक सत्संग

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जानिए भगवान क्या हैं ? किधर हैं और उनसे हमारी मुलाकात कैसे हों ?

क्या आपने कभी सोचा की हमे भगवन का ‘पूरा पता’ मिलेगा !

नहीं ना ! पर संतों की ऐसी कृपा बरसती रहती हीं की हम अधिकारी हों या ना हों फिर भी ऐसे ज्ञान के भंडार हमारे लिए वे खुले चोदते हैं !

सुनिए यहा पूरा पता भगवान का !

तात्विक सत्संग परमात्मा का पूरा पता

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राम सेतु के पत्थर के दर्शन

राम सेतु के पत्थर की पानी मे तैरते हुए की तस्वीरें जिसकी स्थापना ७/६/१४ को जंतरमंतर पर हुई ! इसके दर्शन एकादशी तक होगी |
हरी ओम्!जंतर-मंतर पर अखण्ड धरना एवं जप पाठ नियमित रूप से चल रहा है! इस यग्य की पूर्णाहुति स्वयं बापू जी आकर करेंगे!ऐसा बापू जी ने कहा है! दिनाँक ७/६/१४ की कुछ तस्वीरें
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कृष्ण लीला – पूनम व्रतधारी विशेष – ब्रह्मचर्य

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काली माँ  की उपासना करनेवाले  बहादुर गदाधर  ठाकूर  ने पत्नी शारदा को फिर जीवन भर भोग्या नही माना… ( शारदा जी के पैरों में उन को माँ  के चरणों के दर्शन हुए थे इसलिए गदाधर ठाकुर अर्थात रामकृष्ण परमहंस..) ब्रम्हचर्य  व्रत पालते पालते कई ब्रम्हचारी फिसल जाते…लेकिन स्री  साथ में पत्नी रूप में आई और ब्रम्हचर्य   पालन जीवन भर किया…कैसी भारतीय संस्कृति की व्यवस्था है!..की आप के भाव को बादलो…

विदेश में फ्राइड नाम के मनो वैज्ञानिक  के सिद्धांत  से गुमराह हो गये है लोग…पुत्री पिता की तरफ और पुत्र माता की तरफ काम विकार से आकर्षित होते है ऐसा उस का सिद्धांत  था…लेकिन ये फ्राइड के खुद के जीवन में हुआ होगा, ऐसा सब के जीवन में नही होता..ये उस ने अपने उग्रवादी वमन से जो लिखा है उस से सारा पाश्चात्य  जगत तबाह हो गया… ‘सम्भोग  से समाधि’ का भाषण करने वाला अपना भारत का विद्वान भी फ्राइड का मनोविज्ञान  पढ़ता था… 
भारतीय संस्कृति में ऐसा नही है…दुल्हन के वस्त्र  पहेन  के पुत्री जब ससुराल जाती है सजी धजी तब पिता के गले लगती है…क्या बेटी में पिता के प्रति विकारी आकर्षण रहेगा उस समय?….अथवा पिता का पुत्री के प्रति विकारी आकर्षण रहेगा पुत्री के प्रति?…..नही नही..ये तो मेरी लाडली पुत्री है..ये मेरे पिता है जिन्हों ने मुझे जनम दिया,पाल पोस  कर बड़ा किया,सुंदर संस्कार दिए…कितने कितने सुंदर भाव होते है पिता और पुत्री के एकदुसरे के प्रति.. ‘भावग्राही  जनार्दन!’ …आप जैसा भाव करते वो  जनार्दन हरि  आप को उसी में मदद करते है…भाव का महत्व है…
अभी भी आप आसपड़ोस को माईयों को विकारी नज़र से देखो तो आप को स्वपनदोष हो सकता है..
गदाधर ठाकुर अपनी विवाहिता विधिवत की पत्नी में  माँ का दृढ़ भाव किए तो जीवन भर ब्रम्हचर्य पालन में सफल हुए..कितनी उँचाई है!..आप के अंतरात्मा में कितना सामर्थ्य है!…कोई बात दृढ़ता  से ठान  लेते है तो मनोयोग से हो जाता है…
जो पूनम व्रत करते तो आपदाओं से और दुर्गति से उन की रक्षा होती है..ये तो आप ने बाद में सुना है…
श्रध्दा  पूर्वा सर्व धर्मा फल प्रदा: l
श्रध्दा सभी धर्मों के पूर्व में होती है और मनोरथों को पूर्ण करने वाली फल दायिनी  वो माता श्रध्दा है…वेदों में ‘श्रध्दा सूक्त’ है , उस की अपनी महिमा है….श्रध्दा से सब कुछ  आसान हो जाता है …

विद्यार्थी हेतु सत्संग

विद्यार्थी हेतु सत्संग

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ईश्वर कहाँ रहता है? कैसे मिलता है? वह करता क्या है?

अकबर ने बीरबल के सामने अचानक 3 प्रश्न उछाल दिये।
प्रश्न थे- ‘ईश्वर कहाँ रहता है?
वह कैसे मिलता है
और वह करता क्या है?”

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बीरबल इन प्रश्नों को सुनकर सकपका गये और बोले- ”जहाँपनाह! इन प्रश्नों के उत्तर मैं कल आपको दूँगा।”

जब बीरबल घर पहुँचे तो वह बहुत उदास थे। उनके पुत्र ने जब उनसे पूछा तो उन्होंने बताया- ”बेटा! आज अकबर बादशाह ने मुझसे एक साथ तीन प्रश्न ‘ईश्वर कहाँ रहता है? वह कैसे मिलता है? और वह करता क्या है?’ पूछे हैं।
मुझे उनके उत्तर सूझ नही रहे हैं और कल दरबार में इनका उत्तर देना है।”

बीरबल के पुत्र ने कहा- ”पिता जी! कल आप मुझे दरबार में अपने साथ ले चलना मैं बादशाह के प्रश्नों के उत्तर दूँगा।”

पुत्र की हठ के कारण बीरबल अगले दिन अपने पुत्र को साथ लेकर दरबार में पहुँचे। बीरबल को देख कर
बादशाहअकबर ने कहा- ”बीरबल मेरे प्रश्नों के उत्तर दो।
बीरबल ने कहा- जहाँपनाह आपके प्रश्नों के उत्तर
तो मेरा पुत्र भी दे सकता है।”

अकबर ने बीरबल के पुत्र से पहला प्रश्न पूछा- ”बताओ! ‘ईश्वर कहाँ रहता है?”
बीरबल के पुत्र ने एक गिलास शक्कर मिला हुआ दूध बादशाह से मँगवाया और कहा- जहाँपनाह दूध कैसा है?

अकबर ने दूध चखा और कहा कि ये मीठा है। परन्तु बादशाह सलामत या आपको इसमें शक्कर दिखाई दे रही है। बादशाह बोले नही। वह
तो घुल गयी।

जी हाँ, जहाँपनाह! ईश्वर भी इसी प्रकार संसार की हर वस्तु में रहता है। जैसे शक्कर दूध में घुल
गयी है परन्तु वह दिखाई नही दे रही है।

बादशाह ने सन्तुष्ट होकर अब दूसरे प्रश्न का उत्तर पूछा- ”बताओ! ईश्वर मिलता केसे है?”

बालक ने कहा- ‘जहाँपनाह थोड़ा दही मँगवाइए।”

बादशाह ने दही मँगवाया तो
बीरबल के पुत्र ने कहा- ”जहाँपनाह! क्या आपको इसमं मक्खन दिखाई दे रहा है।

बादशाह ने कहा- ”मक्खन तो दही में है पर इसको मथने प ही दिखाई देगा।” बालक ने कहा-
”जहाँपनाह! मन्थन करने पर ही ईश्वर
के दर्शन हो सकते हैं।”

बादशाह ने सन्तुष्ट होकर अब अन्तिम प्रश्न का उत्तर पूछा- ”बताओ! ईश्वर करता क्या है?” बीरबल के पुत्र ने कहा- ”महाराज! इसके लिए आपको मुझे अपना गुरू स्वीकार करना पड़ेगा।”
अकबर बोले- ”ठीक है, तुम गुरू और मैं तुम्हारा शिष्य।”
अब बालक ने कहा- ”जहाँपनाह गुरू तो ऊँचे आसन पर बैठता है और शिष्य नीचे।”

अकबर ने बालक के लिए सिंहासन खाली कर दिया और स्वयं नीचे बैठ गये।
अब बालक ने सिंहासन पर बैठ कर कहा- ”महाराज! आपके अन्तिम प्रश्न का उत्तर तो यही है।”
अकबर बोले- ”क्या मतलब? मैं कुछ समझा नहीं।”
बालक ने कहा- ”जहाँपनाह! ईश्वर यही तो करता है। “पल भर में राजा को रंक बना देता है और
भिखारी को सम्राट बना देता है।”

हिमालय की तरह दृढ़ होकर . . . .

 

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हिमालय की तरह दृढ़ होकर अपनी रुकावटों को काटो।
यह विश्वास रखो कि जो सोचूँगा वही हो जाऊँगा। सत्यसंक्लप आत्मा तुम्हारे साथ है….
नहीं नहीं, तुम ही सत्यसंकल्प आत्मा हो।
उठो, अपनी शक्ति को पहचानो।
तमाम शक्तियाँ तुम्हारे साथ हैं।
यह ख्याल न करो कि तमाम चीजें पहले इकट्ठी हों, बाद में मैं आगे बढ़ूँ। बल्कि दृढ़ संकल्प करो अपने परम लक्ष्य को हासिल करने का।
चीजें अपने-आप तुम्हारे कदम चूमेंगी।
क्या आप सुख चाहते हैं?…
तो विषय भोग से सुख मिलेगा यह कल्पना मन से निकाल दीजिये। उसमें बड़ी पराधीनता है। पराधीनता दुःख है। भोग्य वस्तु चाहे वह कुछ भी क्यों न हो, कभी मिलेगी कभी नहीं।
इन्द्रियों में भोग का सामर्थ्य सदा नहीं रहेगा। मन में एक-सी रूचि भी नहीं होगी। योग-वियोग, शत्रु-मित्र, कर्म-प्रकृति आदि उसमें बाधक हो सकते हैं। यदि विषयभोग में आप सुख को स्थापित कर देंगे तो निश्चय ही आपको परवश और दुःखी होना पड़ेगा।

— पूज्य बापूजी

 

संत आशारामजी बापू का समर्थन नरेन्द्र मोदी को ? जानिये सच !

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क्या पूज्य संत श्री आशारामजी का समर्थन श्री नरेन्द्र मोदी को है ? हमारे अनुसार शत प्रतिशत है !

यदि ऐसा न होता तो पूज्य श्री के आश्रम से प्रकाशित मासिक पत्रिका “c”  में मोदी जी के लिये क्या इतने सराहनीय शब्द होते ?

“ऋषि प्रसाद” में उनके माध्यम से भारत को विश्व गुरु के पद पर आसीन करने की भी बात की गयी है !

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Julm Sahena Dugna Paap – Sant Asharamji Bapu

Julm Sahena Dugna Paap - Sant Asharamji Bapu

मातृ-पितृ पूजन दिवस (Parent’s Worship Day) 14th February [NEW SHORT FILM]

मातृ-पितृ पूजन दिवस (Parent's Worship Day) 14th February [NEW SHORT FILM]

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मातृ-पितृ पूजन दिवस (Parent’s Worship Day) 14th February [NEW SHORT FILM]

#ParentsWorshipDayOn14Feb मात-पिता की सेवा, ईश्वर की सेवा !

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