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Antahkaran ke 3 dosh kya aur kaise door karen

 

अंतःकरण के तीन दोष कैसे दूर करें ?

परम पूज्य संत श्री आशारामजी बापू की अमृतवाणी

सत्संग के मुख्य अंश :

* अन्तःकरण के तीन दोषों को वेदांत की भाषा में मल बोलते है |

* मल माना आगे पीछे का सोचे बिना मज़ा करो ,गन्दगी है |

* मल को दूर करने केलिए धर्म ,कर्म,नियम | वासना को नियंत्रित करने के लिए धर्म है |

* मन को एकाग्र करने के लिए ध्यान का महत्त्व है |

* ध्यान से योग्यता बढ़ती है लेकिन जीव भाव बना रहता है |

* मल को मिटाने के लिए शुद्ध कर्म,चंचलता को मिटाने के लिए ध्यान-एकाग्रता लेकिन अज्ञान को मिटाने के लिए आत्मज्ञान की जरुरत पड़ती है |

There are 3 faults of ANTAHKARAN (inner instrument) . They are called MAL (Bad) in language of Vedanta.
Mal means whatever comes in mind,  eats, drink and have fun.Do not think about past and results. Have fun in present. Like a moth which gets burned in the flame just for pleasure this is Senselessness, is mal.
It is foolishness. The Mal means fault in understanding. That is called mal. DHARAMKARAMNIYAM (Religion – Act – regulation) is to remove mal. DHARAM (religion) is to control desires.
And to concentrate mind and to get  (spiritual) powers DHYAN (MEDITATION) is very important.
But DHYAN (meditation) increases abilities, gets strength, personality remains, JEEV BHAV (body gesture) exists.
If personality remains than he/she will use power of DHYAN for enjoyment,will use it to praise of himself/ herself and will use it up. Again consciousness is required and pure deeda to remove mal,
DHYAN (Meditation) and concentration to remove fickleness, but self-consciousness to remove ignorance.
My Guruji used to say –
Dirt in the house will be removed only by sweeping, but the holes of house can be removed only by filling with cement-concrete.
Darkness won’t removed by cow-dung or cement or sweeping.
That darkness can be removed only by lighting. Utterly certain true thing

राम सेतु के पत्थर के दर्शन

राम सेतु के पत्थर की पानी मे तैरते हुए की तस्वीरें जिसकी स्थापना ७/६/१४ को जंतरमंतर पर हुई ! इसके दर्शन एकादशी तक होगी |
हरी ओम्!जंतर-मंतर पर अखण्ड धरना एवं जप पाठ नियमित रूप से चल रहा है! इस यग्य की पूर्णाहुति स्वयं बापू जी आकर करेंगे!ऐसा बापू जी ने कहा है! दिनाँक ७/६/१४ की कुछ तस्वीरें
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कृष्ण लीला – पूनम व्रतधारी विशेष – ब्रह्मचर्य

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काली माँ  की उपासना करनेवाले  बहादुर गदाधर  ठाकूर  ने पत्नी शारदा को फिर जीवन भर भोग्या नही माना… ( शारदा जी के पैरों में उन को माँ  के चरणों के दर्शन हुए थे इसलिए गदाधर ठाकुर अर्थात रामकृष्ण परमहंस..) ब्रम्हचर्य  व्रत पालते पालते कई ब्रम्हचारी फिसल जाते…लेकिन स्री  साथ में पत्नी रूप में आई और ब्रम्हचर्य   पालन जीवन भर किया…कैसी भारतीय संस्कृति की व्यवस्था है!..की आप के भाव को बादलो…

विदेश में फ्राइड नाम के मनो वैज्ञानिक  के सिद्धांत  से गुमराह हो गये है लोग…पुत्री पिता की तरफ और पुत्र माता की तरफ काम विकार से आकर्षित होते है ऐसा उस का सिद्धांत  था…लेकिन ये फ्राइड के खुद के जीवन में हुआ होगा, ऐसा सब के जीवन में नही होता..ये उस ने अपने उग्रवादी वमन से जो लिखा है उस से सारा पाश्चात्य  जगत तबाह हो गया… ‘सम्भोग  से समाधि’ का भाषण करने वाला अपना भारत का विद्वान भी फ्राइड का मनोविज्ञान  पढ़ता था… 
भारतीय संस्कृति में ऐसा नही है…दुल्हन के वस्त्र  पहेन  के पुत्री जब ससुराल जाती है सजी धजी तब पिता के गले लगती है…क्या बेटी में पिता के प्रति विकारी आकर्षण रहेगा उस समय?….अथवा पिता का पुत्री के प्रति विकारी आकर्षण रहेगा पुत्री के प्रति?…..नही नही..ये तो मेरी लाडली पुत्री है..ये मेरे पिता है जिन्हों ने मुझे जनम दिया,पाल पोस  कर बड़ा किया,सुंदर संस्कार दिए…कितने कितने सुंदर भाव होते है पिता और पुत्री के एकदुसरे के प्रति.. ‘भावग्राही  जनार्दन!’ …आप जैसा भाव करते वो  जनार्दन हरि  आप को उसी में मदद करते है…भाव का महत्व है…
अभी भी आप आसपड़ोस को माईयों को विकारी नज़र से देखो तो आप को स्वपनदोष हो सकता है..
गदाधर ठाकुर अपनी विवाहिता विधिवत की पत्नी में  माँ का दृढ़ भाव किए तो जीवन भर ब्रम्हचर्य पालन में सफल हुए..कितनी उँचाई है!..आप के अंतरात्मा में कितना सामर्थ्य है!…कोई बात दृढ़ता  से ठान  लेते है तो मनोयोग से हो जाता है…
जो पूनम व्रत करते तो आपदाओं से और दुर्गति से उन की रक्षा होती है..ये तो आप ने बाद में सुना है…
श्रध्दा  पूर्वा सर्व धर्मा फल प्रदा: l
श्रध्दा सभी धर्मों के पूर्व में होती है और मनोरथों को पूर्ण करने वाली फल दायिनी  वो माता श्रध्दा है…वेदों में ‘श्रध्दा सूक्त’ है , उस की अपनी महिमा है….श्रध्दा से सब कुछ  आसान हो जाता है …

बापूजी के दर्शन (५/६/’१४)

 

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गरीबों के लिए पूज्य बापूजी की सहानुभूति !

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 मुझे साम्राज्य की लालसा नहीं, मैं स्वर्ग भी नहीं चाहता ! मेरे जीवन की बस एक ही आकांक्षा है कि इस संसार के दुखी मनुष्यों के कष्टों का नाश कर दूँ !  संत आशाराम बापू का जीवन असहाय और दुखी लोगों की सेवा का एक जीता-जागता उदाहरण है ! जहाँ कहीं गरीबी और अभाव है, जहाँ कहीं रोग और शोक है, जहाँ कहीं अज्ञान और अशिक्षा है, बापू का ह्रदय वहीँ उमड़ पड़ता है !

 

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अपने घर में तो दिया जलाओ, पर किसी गरीब के घर का दिया बुझा हो तो उसके यहाँ भी दिया जला आओ ! गरीब और अमीर के बीच इतना बड़ा फासला, इतना भेद-भाव ! उन गरीबों का ख्याल करोगे तो परमात्मा आप पर ज़रूर राजी होगा ! आप स्वयं तो नए कपडे पहनो, मन नहीं है, पर किसी गरीब को एक कपडा दे आओगे तो ईश्वर तुम पर प्रसन्न हुए बिना रहेगा नहीं !

 

 

आसुमल से हो गए साईं आशाराम !!

पूज्य दादागुरु लीलाशाह बापू की करुणा कृपा से हमारे गुरुदेव आसुमल से आशाराम हुए और आज उनके ही आशीर्वाद से हजारों नहीं वरन लाखों – लाखों और करोड़ों – करोड़ों साधक भाई-बहन लाभान्वित हो रहे हैं और उन्नति के मार्ग पर अग्रसर हो रहे हैं !

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पांच वर्ष के तांशु का कमाल ! गुरुभक्ति ने किया अद्भुत व अलौकिक चमत्कार !

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दिल्ली के एक घर में सभी छोटे छोटे बच्चे आपस में खेल रहे थे और घर के बड़े बाहर गए हुए थे ! तभी अचानक घर  बीटा खेलने की चाह में छत से नीचे गिर गया ! ये देख सभी घबरा गए और तभी उसके चचेरे भाई तांशु ने जिसकी उम्र मात्र पांच वर्ष की ही थी एवं पूज्य बापूजी से दीक्षित था, उसने बाकि बच्चों की सहायता से उस बेहोश बच्चे को कार में रखा और गुरुदेव का ध्यान करते हुए गाडी में बैठ गया ! जिसने कभी गाडी का हैंडल तक नहीं पकड़ा था, उसको आज अचानक प्रेरणा हुई, कि गुरुदेव उसके  साथ हैं और वो निश्चिंत और निडर होकर गाडी चलाये ! उसने गाडी स्टार्ट की और घर से ग्यारह किलोमीटर दूर हॉस्पिटल में ले जाकर भर्ती करवा दिया और अंततः उस बच्चे की जान बचायी जा सकी ! 

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इस अद्भुत वाकये का प्रसारण सभी न्यूज़ चैनल्स पर किया गया एवं अखबारों में भी प्रकाशित हुआ !
यूँ तो पांच साल का बच्चा कार चलाये तो ये कानूनी अपराध की श्रेणी में आता है, परन्तु तांशु ने तो गुरुदेव की प्रेरणा से कार चलायी थी और किसी की जान बचायी थी, इस कारण से उसे राष्ट्रपति की तरफ से पुरस्कृत भी किया गया था ! इसके अलावा बहुत से बड़े एवं उच्च पदों पर आसीन सज्जनो द्वारा भी पुरस्कृत हुआ तांशु !
पर वो हर बार यही कहता रहा और आज भी तांशु के मुख से यही शब्द निकलते हैं कि ” मैंने कुछ नहीं किया, मैं तो बस कार में जाकर बैठ गया था, और जब बापूजी की शक्ति मेरे साथ थी तो सब अपने आप हो रहा था, मुझे तो बस ऐसा लग रहा था कि गुरुदेव मुझे अपनी गोद में बैठाये हैं और स्वयं कार चला रहे हैं !”
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धन्य हैं ऐसे गुरुदेव और उनके ऐसे शिष्य जो हर कदम पर गुरुदेव की करुणा – कृपा को अनुभव करते हैं ! और ऐसे गुरुदेव को पाकर हम साधकों का जीवन भी धन्य है कि वो कभी किसी भी पथ या मार्ग में हमें अकेला नहीं छोड़ते !
 
[youtube https://www.youtube.com/watch?v=ZmFa-guDLm0&feature=youtu.be]

Julm Sahena Dugna Paap – Sant Asharamji Bapu

Julm Sahena Dugna Paap - Sant Asharamji Bapu

मातृ-पितृ पूजन दिवस (Parent’s Worship Day) 14th February [NEW SHORT FILM]

मातृ-पितृ पूजन दिवस (Parent's Worship Day) 14th February [NEW SHORT FILM]

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मातृ-पितृ पूजन दिवस (Parent’s Worship Day) 14th February [NEW SHORT FILM]

#ParentsWorshipDayOn14Feb मात-पिता की सेवा, ईश्वर की सेवा !

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