Blog Archives

ज्ञानवान का आत्मपद

some hindu sants throughout agesज्ञानवान आत्मपद को पाकर आनंदित होता है और वह आनंद कभी दूर नहीं होता,

क्योंकि उसको उस आनंद के आगे अष्टसिद्धियाँ तृण के समान लगती हैं।

हे रामजी ! ऐसे पुरुषों का आचार तथा जिन स्थानों में वे रहते हैं, वह भी सुनो।

कई तो एकांत में जा बैठते हैं,

कई शुभ स्थानों में रहते हैं,

कई गृहस्थी में ही रहते हैं,

कई अवधूत होकर सबको दुर्वचन कहते हैं,

कई तपस्या करते हैं,

कई परम ध्यान लगाकर बैठते हैं,

कई नंगे फिरते हैं,

कई बैठे राज्य करते हैं

कई पण्डित होकर उपदेश करते हैं,

कई परम मौन धारे हैं,

कई पहाड़ कीकन्दराओं में जा बैठते हैं,

कई ब्राह्मण हैं,

कई संन्यासी हैं,

कई अज्ञानी की नाईं विचरते हैं

कई आकाश में उड़ते हैं

और तो क्या कहे ज्ञानी के बारे में उनकी लीला तो वे ही जाने |

 

Advertisements
%d bloggers like this: